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Amma

यह चित्र कथा एक मेले में अम्मा के खोने, और बच्चे द्वारा अम्मा को तलाशने की कहानी है। यह कहानी मेले के बहुरूप चित्रों के माध्यम से मेले का विस्तृत व बहुसांस्कृतिक परिवेश गढ़ती है। अम्मा को खोजते बच्चे का कुछ सोचना और फ़िर भागकर महिला पुलिस से पूछना ‘क्या आपने इस मेले में एक ऐसी अम्मा को देखा, जिसके पास मेरे जैसा बच्चा नहीं है?’ सवाल से बच्चे की त्वरित सूझबूझ और सहज भोलेपन का जो रूप उभरता है, वह इसे एक दिलचस्प व नायाब रचना बनाता है।

Jugnoo Prakashan (Ektara) 2021 Kavita Singh Kale Kavita Singh Kale

Akeli Cheenti

एक नन्ही किताब जिसमें बहुत ही सरलता से एक चींटी की कहानी पिरोई गई है। जैसे बच्चे अक्सर चींटियों की कतार के पीछे-पीछे चलते हैं, वैसे ही लेखक और चित्रकार हमें एक अकेली चींटी के साथ सैर कराते हैं। इस किताब के ज़रिये मिलिए एक ऐसी चींटी से जो कई मुश्किलों का सामना करती है और अपने साहस के बल पर एक नया रास्ता खोजती है। एक अनोखी किताब जो बच्चों और वयस्क पाठकों का मन जीत लेगी।

Jugnoo Prakashan (Ektara) 2022 Chandan Yadav Shrinivas Balakrishna

Keral Ke Kele

इस संकलन की कविताओं का विषय चयन, ताल लय और शब्दों का सहज दोहराव इन्हें बच्चों की पसंदीदा रचनाएँ बनाता है । कुछ कविताएँ बच्चे मज़े-मज़े यादकर गुनगुना सकते हैं। समृद्ध व सादगीपूर्ण भाषा में रची कविताएँ , शिक्षकों के लिए बच्चों को भाषा सिखाने का एक बढ़िया संसाधन उपलब्ध कराती हैं । ‘धम्मक धम्मक आता हाथी’ और ‘ऊँट चला’ जैसी चर्चित रचनाओं में जीवों के चालढाल और रहन सहन का सुन्दर, सजीव चित्रण लुभाता है। सादगी भरे चित्र कविताओं के साथ बोलते- डोलते से लगते हैं और इन्हें नया अर्थ देते हैं।

Jugnoo Prakashan (Ektara) 2021 Prayag Shukl Debbrat Ghosh

Ek Kahani

‘एक कहानी’ सात सम्मोहक कहानियों का विरल संग्रह है।यहाँ बचपन के अनुभव और स्मृतियाँ कल्पना का मेल पाकर विलक्षण कथा-रूपों में बदल जाती हैं।इन कहानियों  का जादुई और अतीन्द्रिय लोक हमारी कल्पना-शक्ति को उद्दीप्त  करता है और सब कुछ को पुन: नये नये तरीक़े से देखने को बाध्य करता है।भाषा का ऐसा खेल और अप्रत्याशित संयोजन विस्मित करता हुआ हमें वस्तुओं के अंदरूनी जगत में ले जाता है।यहाँ लोक कथाओं- सी सादगी और बनक है और विज्ञान कथाओं का रोमांचक रहस्य-बोध ;लेकिन अपनी दृष्टि और भाषा-व्यवहार में बिल्कुल अनूठा,अप्रमेय।

Jugnoo Prakashan (Ektara) 2021 Vinod Kumar Shukl Atanu Roy

Bees Kachori Poori Tees

किताब में सुविख्यात बाल साहित्य लेखक श्रीप्रसाद द्वारा बच्चों के लिए रची गई कविताओं को संजोया गया है। जिनमें बालमन की गहराइयाँ हैं, जीव-जीवन का स्पंदन है, रिश्तों की गरमाहट है, मनोरंजन, कौतुक और ज्ञान-विज्ञान है। शब्दों के खेल, सवाल और वह सब कुछ जो बच्चों को भाता है। कविताओं में यह सब इतना सहज,स्वाभाविक और लयबद्ध है कि बार बार पढ़ने-गुनगुनाने का मन करता है। चित्र प्रभावशील और कविताओं को उभारते से लगते है।‘ पौधा तो जामुन का ही था’ और ‘हाथी चल्लम चल्लम’ बहुत दिलचस्प हैं । ये कविताएँ हिंदी के आधुनिक बाल साहित्य की एक परम्परा से रूबरू कराती हैं।

Jugnoo Prakashan (Ektara) 2021 Sriprasad Proiti Roy

Gyarah Rupay Ka Fountain Pen

इस किताब की कहानियाँ बेहद नएपन से आम जीवन के सामाजिक, साहित्यिक, सांगीतिक, मानवीय, शैक्षिक और पर्यावरण से जुड़े गहरे सरोकारों को अपने में शामिल करती जाती है। जिनमें बच्चों के स्वभाव और चाहते हैं , उनकी उदासी और दोस्ती है । और भी बहुत कुछ है जो आज के साहित्य में अपेक्षित है । कहानियाँ जितने अनूठे विषयों पर हैं, कही भी उसी अनूठेपन से गई है । बेहद सधी हुई ताज़ातरीन भाषा, विचारों व भावों के अनुरूप हैं । कहानियों को विस्तार और गहराई देने का ज़िम्मा लेते चित्र बेमिसाल हैं।

Jugnoo Prakashan (Ektara) 2021 Amit Datta Taposhi Ghoshal

Lightning

लाइटनिंग, यह सुन्दर और कल्पनाशील नाम है एक बाघिन का, जिसके इर्द गिर्द यह कहानी बुनी गई है। कहानी बाघिन के बारे में रूढ़ मान्यताओं को दरकिनार करते हुए उसकी नैसर्गिकता को सामने लाती है। उसके अपने घर व घर के अन्य बाशिंदों के साथ प्यार और चाहत के रिश्तों को उभारती है। और उभारती है मानव समुदाय की जंगल जीवों के प्रति उस आत्मीय जवाबदेही को जिसके बिना पर ही इन सबका जीवन संभव और सुखद लगता है। सधी हुई भाषा में ताजगी, सादगी और रवानगी है। सभी चित्र बेमिसाल है खासकर तब का जब ‘चाँद को गर्व हो रह था…कुछ ही देर पहले वह यहाँ थी’ और बाघिन के वहाँ होने को चित्र में उकेरा गया है।

Jugnoo Prakashan (Ektara) 2021 Prabhat Allen Shaw

Machli Nadi Khol Ke Baithi

इस नन्हीं-सी कल्पनाशील कविता को बार-बार पढ़ने की अभिलाषा होती है शायद अगली बार कुछ अर्थ या भाव बन सके। कुछेक बार पढ़ने पर ही कविता से निकटता बन पाती है । प्रकृति के सन्दर्भ में खोल शब्द से कई मायने बनते बदलते रहते हैं। संभवतः कविता कहती है , खोल के प्रस्तुत प्रकृति में कुछ भी छुपाए या चुराए जाने का डर नहीं है, यह तो दुनिया है, जो चप्पे-चप्पे तालों में है । सुकून देते चित्र कविता के भाव को कुछ और आगे ले जाते हैं। लेखन की केलीग्राफ़ी सुन्दर व कविता के भावों के अनुरूप है। कविता को शब्दशःयाद करना भले संभव न हो, फिर कभी दुबारा पढ़ने पर कुछ नया कहने, गुनगुनाने वादा ज़रूर करती है।

Eklavya 2021 Sushil Shukl Vasundhara Arora