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‘बेटियाँ भी चाहें आज़ादी’ ताक़त और विश्वास के साथ स्त्रियों की हरसंभव स्वाधीनता की उद्घोषणा करती है। यहाँ साधारण से लगने वाले वाक्य भी नारों जैसी तात्कालिकता और ओजस्विता प्राप्त कर लेते हैं।जीवन के हर क्षेत्र में हर तरह की आज़ादी के बग़ैर स्त्री-पुरुष समानता संभव नहीं है।यह किताब संविधान प्रदत्त अधिकारों और मन की बात कहने की आज़ादी की माँग करती है।आकर्षक चित्रों से सज्जित यह किताब बेटियों की पू्र्ण स्वाधीनता का घोषणा-पत्र है।
‘ये सारा उजाला सूरज का’ एक सम्मोहक कविता है जो संसार की हर शै में सूरज की उपस्थिति और रूपांतरण को प्रस्तुत करती है।हवा,पानी,जीवों तक में सूरज अलग अलग रंग-रूप में मौजूद है।नये बिम्बों,कल्पनाशील प्रयोगों और जादुई संगीत के कारण यह कविता पुस्तक सहज ही कंठस्थ की जा सकती है।शब्दों को विस्तार देते चित्र सूर्य-किरण के वर्ण-क्रम को व्यक्त करते हैं।सूर्य के महिमा-गान के साथ यह कविता सभी जीवों और पदार्थों की आंतरिक एकता को स्वर देती है।
‘बस्ती में बाढ़’ रचनाकारों की आपबीती पर आधारित तीन कथाओं का संग्रह है जो गरीब बस्ती में अचानक आयी बाढ़ की त्रासदी और मनुष्य के जीवट का बोलचाल की भाषा में वर्णन करता है।दुख और मुसीबतों के बीच भी यहाँ कुछ हँसने और खुश होने की गुंजाइश निकल आती है।साथ ही साथ ये कहानियाँ कुछ सवाल भी करती हैं—क्या बाढ़ केवल प्राकृतिक आपदा है या हमारा समाज भी इसके लिए ज़िम्मेवार है।किताब के अंत में एक लेख भी है जो इन सवालों पर चर्चा करता है।
इस किताब में हिन्दी के अद्वितीय कवि नवीन सागर की ढेर सारी कविताओं का अनूठा संकलन है। इन कविताओं में वह सब कुछ है जो बचपन के इर्द गिर्द होना चाहिए। कल्पनाओं की उड़ान, रिश्तों की गर्माहट और संवेदनाएँ हैं। बच्चों की शैतानियाँ और हिदायतें हैं। उनकी आज़ादी, उत्सुकता, खिलंदड़पन और भाषा व शब्दों के खेल हैं। और यह सब कुछ बच्चों और बड़ों के आसपास के जीवन सन्दर्भों से लेकर पिरोया हुआ है। कविता दादाजी नाराज़ है मानवीय संवेदनाओं की मर्मस्पर्शी बानगी प्रस्तुत करती है।
“कहानी कहती है– दुनिया इसके सभी रहवासियों से है। रहवासियों के बनाने से दुनिया बनती है। मिलकर जीवन जीने, एक दूसरे का ख्याल रखने, जरूरतों की कद्र से यह दुनिया बनती रही आई है। यह दुनिया के उजाले को बनाए रखने में अपने हिस्से के उजाले को शामिल करने की कहानी है। यह सब पाने के लिए पाठक को कहानी में कई बार डूबना उतरना पड़ता है।
किताब में की गई चित्रकारी, किसी बच्चे या शायद तारिक के द्वारा बनाए गए चित्रों सा आभास कराती है। के बनाए चित्रों का आभास कराती है। यह दृष्टि चित्रकारी को नया आयाम देती हैI पानी के रंगों से बने चित्र एक दूसरे से घुलते मिलते नज़र आते हैं।”
जंगली जीवों पर आधारित किस्सों के इस संकलन में बहुत रोमांचकारी कहानियां हैं जिन्हें पढ़कर पाठक बिलकुल मंत्रमुग्ध हो जाएंगे। उस लिहाज़ से यह संकलन ऐसे दूसरे संकलनों के समान है। लेकिन जो बात इसे ख़ास बनाती है, वो इसके रोमांचकारी किस्सों से भी ज़्यादा यह है कि लेखक ने जंगली जीवों की आदतों, उनके हाव-भाव और उनकी संरचना आदि का बहुत बारीक वर्णन भी कहानियों में समाहित किया है और वह भी उनके रोमांच को बरकरार रखते हुए।
जैसा की नाम में ही निहित है, ये एक चोर की चौदह रातों का ताना-बाना है। हर रात की एक कहानी है और हर कहानी जीवन और दुनिया के कड़वे सच से रूबरू करवाती है। ये कहानियां पाठक को सोचने पर मजबूर करती हैं कि आखिर चोर, साधू-संत, भला या बुरा- क्या ये सब वर्गीकरण सचमुच इंसान के चरित्र और कर्म पर आधारित हैं या समाज द्वारा गढ़ा गया भ्रम। किशोरों के लिए ये कहानियां एक अनमोल खज़ाना हैं।
इस कहानी में वेदना और संवेदना दोनों हैं। कहानी में पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों और प्रकृति के प्रति बहुत ही संवेदनशील दृष्टिकोण उभर कर सामने आता है। लेकिन दूसरी ओर इस संवेदना को तार-तार करती हुई भौतिकवादी इंसान की प्रवृत्ति की तस्वीर भी उभरती है। दोनों के टकराव को लेकर यह बेहतरीन कहानी बुनी गई है। कहानी का नाम गोदाम क्यों है और उस गोदाम में इंसान की क्या जगह है, यह कहानी के अंत में पता चलता है।