Loading...
भीतर और बाहर के परस्पर संबंध को व्याख्यायित करती यह पुस्तक केवल एक कविता से बनी है। यह कविता प्रकृति का सम्मान और प्रकृति की निजता की रक्षा का संकल्प है। साथ के चित्र भी इस भाव को अनेक रंगों और आकृतियों के माध्यम से मुखरित करते हैं।यहाँ कम शब्दों में सूत्रात्मक शैली में मनुष्य,प्रकृति और परिवेश के संबंध को मूर्त किया गया है।
कई पन्नों पर नयनाभिराम चित्रों के साथ सज्जित यह कविता रोज़-ब-रोज़ के एक सुपरिचित दृश्य यानी फेरीवालों के मुहल्ले में आने और बच्चों-सयानों के उनके पास आ जुटने का वर्णन करती है। बोलचाल की सहज पर व्यंजक भाषा में इसकी रचना हुई है। पूरे-पूरे सुगठित वाक्य इसकी शोभा हैं। अनेक ब्योरों से भरी यह कविता चित्रात्मक और मार्मिक है। फेरीवाले के बीमार पड़ने पर पूरे मुहल्ले की सहानुभूति हमारे सामाजिक जीवन और मानवीयता को दर्शाती है।
यह किताब, बच्चों के कल्पनाशील और अचरज भरे ढेर सारे सवालों और गुलज़ार के उतने ही अलबेले और मज़ेदार जवाबों की बानगी प्रस्तुत करती है। एक तरफ़ सवालों में बच्चों का सहज उत्सुकताबोध दिखाई देता है तो दूसरी ऒर जवाबों में वैसा ही विस्मयबोध। सवाल-जवाब के भावों में पगे सादगी भरे चित्र इसे और भी पठनीय और दिलचस्प बनाते हैं। प्रस्तुति और आकल्पन में एक तरह का खुलापन और खिलापन है जो पढ़ने वाले को ख़ुशी और सोचने का अवसर मुहैया कराते हैं। एक अनुपम किताब।
कहानी नरम गरम दोस्ती, हाशियाकृत समुदाय के जीवन यथार्थ से अवगत कराती है। इसमें स्कूल में पढ़ने वाले दो बच्चों की दोस्ती का भावपूर्ण घटनाक्रम है। इस तरह की कहानियाँ बाल साहित्य में बिरले ही पढ़ने को मिलती हैं। भाषा के ज़रिए यह कहानी कई स्तरों पर तरह-तरह के अर्थ बनाती है और सोचने-विचारने व सवाल उठाने को बाध्य करती है। सहज सरल भाषा पाठक को जुड़ाव महसूस कराती है। किताब के चित्र कहानी के परिवेश, सन्दर्भ और कथानक को सहजता से उभारते हैं।
‘बाघ भी पढ़ते हैं’ चंदन यादव की छोटी छोटी कहानियों और बतकहियों का संकलन है। इसकी शीर्षक कहानी बाघ और गाय की एक लोक कथा को आधार बनाकर लिखी गई है जिसमें हर पात्र अपनी घिसी पिटी भूमिका को छोड़कर नए तरीके से पेश आता है। हर कहानी में भाषा की सादगी, उसकी ताकत और इस्तेमाल का अंदाज़ देखने को मिलता है। भित्ति चित्र शैली में अमृता के चित्र इन कहानियों में उतरने का रास्ता देते हैं।
ऐसी कितनी ही कविताएं और गीत हैं जो बचपन में खेल का अनिवार्य हिस्सा रही हैं। टके थे दस भी उन्हीं में से एक है। लेकिन इसमें लोकगीत की खुशबू है। उलटी गिनती में चलने वाला ये गीत अपने हर अंक में एक मस्ती समेटे हुए है। इसमें लोक जीवन की हंसी ठिठोली है और रोज़मर्रा के जीवंत चित्र हैं। सेठ जी का पात्र हमें उन सब चरित्रों से मिलवाता है जो कहीं छुपे रहते हैँ और दृश्य बनकर आते हैं।
जुगनू भाई एक चित्रांकित कविता है जिस में एक जुगनू और अन्य कीड़ों की रात में मुलाकात होती है। किताब में खूबसूरत रंगीन चित्र हैं जो रात के दृश्य को एक अलग अंदाज़ में पेश करते हैं। छोटे बच्चों के लिए यह बहुत ही उचित किताब है। कविता के शब्द और चित्र मिलकर एक सौम्य और अनूठा अनुभव देते हैं। चित्रों में रात का अंधेरा और उसमें हल्की-हल्की रोशनी को काले पन्नों पर अनोखे ढंग से उतारा गया है।
इस किताब में बचपन के नानारूपों को रंगों और कूची से उकेरा गया है। जिनमें रोना-हँसना, घूमना-फिरना, चलना-चलाना, देखना-दिखाना के साथ ही रचना, कल्पनाओं व मस्ती के भावपूर्ण रंग हैं। दुनिया एक बच्ची है और उसकी अपनी एक दुनिया है किताब में। कविता बहुत आकर्षक है जिसमें कई बिंब और कल्पनाएँ उभरती हैं। बहुत कुछ कहते बेहतरीन चित्रों और विचारशील कविता की जुगलबंदी से बनी एक न्यारी चित्र पुस्तक। उत्कृष्ट आकल्पन और प्रस्तुति इसे और भी सुन्दर बनाती है।