होम लाइब्रेरी, ताकि राजस्थान के भील बच्चों में बनी रहे पढ़ाई की संस्कृति
Posted on by Ravi
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मनीषा चौधरी 1986 से किताबोंं की दुनिया से जुड़ी हुई हैं। नारीवादी प्रकाशन केे साथ काम करते हुए उन्होंंने कई महत्वपूर्ण अनुवाद किए हैं, जिन्हें समीक्षकोंं ने सराहा है और कई पुरस्कारों सेे सम्मानित भी किया गया है। हर बच्चे को अपनी ज़बान में मज़ेदार किस्से-कहानियाँँ पढ़ने का मौका मिले इस कोशिश में मनीषा ने […]
प्राची कालरा दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाती हैं और उन्हें कहानियाँ सुनाना बेहद पसंद है। बचपन में उन्होंने अपनी दादी से मज़ेदार कहानियाँ सुनीं हैं। अब वे पढ़ने की बारीकी और बाल साहित्य के बारे में पढ़ाती हैं। उनका मानना है कि मज़े के लिए पढ़ना अपने समय का इस्तेमाल करने की सबसे बेहतरीन चीज है। […]