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You may not understand why the child on the front cover of this book hangs upside down. Illustrator Shubham Lakhera aims to make the reader wonders why in the same way that Mini Shrinivasan’s protagonist with Down’s Syndrome doesn’t understand why her class fellows behave the way they do with her. This picture book shines a light on the nature of some special children even as it helps readers understand them.
This looks like a picture book but behind the cover is a mighty important theme. Asha Nehemiah has touched upon domestic abuse in a moving and direct manner. Aindri Chakraborty too enters into this theme with chilling pictures. And yet, the story is written with hope even though there might not be a final solution. That too is real. Teachers, librarians and parents must help the young reader navigate this book with care.
कविता लयात्मक और सुमधुर है। सुमधुर ध्वनियों और आनुप्रासिक प्रयोगों के कारण पढ़ना सीख रहे शुरुआती पाठक इस किताब की ओर आकर्षित होंगे। ‘अकॉर्डियन फोल्ड’ के कारण इस किताब को पलटने में भी एक खेल है। अर्थ के स्तर पर भी यह एक अच्छी कविता है। भाव के स्तर पर कविता में स्वतंत्रता और खुलेपन का भाव है। अपने अनूठे डिज़ाइन, सांगीतिक भाषिक प्रयोगों और खुलेपन के भाव के कारण यह इस वर्ष प्रकाशित हुई किताबों में एक अच्छी किताब है।
इस संकलन से पता चलता है कि सस्ती छपी किताबें भी कितनी सुरुचिपूर्ण हो सकती हैं। प्रभात और सुशील की कविताएं बहुत अच्छी हैं। अच्छी किताब का फोर कलर में होना कतई ज़रूरी नहीं। प्रोइती राय के चित्रों में बच्चों के चित्रों की सी सहजता है।
हर लिहाज़ से उत्कृष्ट किताब। एक बच्ची एक पिल्ले से इतना जुड़ाव महसूस करने लगती है कि वह हर समय उसी के बारे में सोचती है और उसे घर लाना चाहती है। माँ शुरू शुरू में बहुत संवेदनशील नहीं है, लेकिन धीरे-धीरे मोह में पड़ी बच्ची की मनोदशा समझ उसे घर ले आने को तैयार है। अंतिम पन्ने पर शब्दों का अचानक चले आना एक नया और सुखद प्रयोग है, जैसे अंतर्मन में चल रहे भाव अचानक शब्दों से छुए गए हों। चित्रों में बच्चों के चित्रों की सी सहजता है जो कलात्मक युक्ति के रूप में सामने आती है।
जंगल,पेड़ पौधों और जीवों तथा तालाब के माध्यम से पारस्परिक प्रेम, सहानुभूति एवं एक दूसरे के सुख दुख में साथ होने की भावना को जाग्रत करने वाली संक्षिप्त किंतु मार्मिक कथा। यहाँ लोककथाओं का भी तत्व है। जंगल की रहस्य को सरल शब्दों में व्यक्त किया गया है। स्याह-सफेद। चित्र वातावरण को साकार करते हैं।
छोटी सी,प्यारी कहानी जो दो अलग अलग डरों और उनके खत्म होने की कहानी है। बेहद कोमल भाव को केंद्र में रखकर रची गयी यह चित्र-कथा बड़े आशय की गाथा बन जाती है–निर्भयता की गाथा। चित्र कथा को प्रस्तुत भी करते हैं और उनके पूरक भी हैं। यहाँ शब्द और चित्र की जुगलबंदी है।
बच्चों को शब्दों को उलट-पुलट कर देखना अच्छा लगता है। यह किताब पढ़ना सीख रहे शुरुआती पाठकों को कुछ ऐसा ही आनंद देगी। एक शब्द ‘खाना’ को लेकर पूरी किताब में चुहल की गई है। किन-किन शब्दों के साथ खाना शब्द जुड़ता है और कैसे-कैसे संज्ञाओं और क्रियाओं को रचता है इसे लेखक और चित्रकार ने आनंद लेकर दिखाया है। यह सही अर्थों में एक चित्र-पुस्तक है। भाषा और छवियों की साझेदारी इस किताब में दिखती है। यह इस वर्ष की एक अच्छी, आनंददायक किताब है।