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हकीम अण्टा गफील

इस आकर्षक किताब में हकीम साहिब एक गुज़रे ज़माने की तहज़ीब से हमारा परिचय करवाते हैं। उनका घोड़ा सुंदर और अक्लमंद है और हकीम साहिब को गाँव में सही जगह ले जाता है।

उर्दू में बाल-साहित्य की याद दिलाने वाली यह कविता–किस्सागोई की ताज़गी, हास्य के हल्के छींटों और बेहतरीन चित्रों के माध्यम से आपको बराबर अपनी दुनिया में खींच लेती है। संवाद की गुंजाइश हर पन्ने पर मौजूद है। बेहतरीन चित्र और डिज़ाइन वाइट स्पेस का खूबसूरती से इस्तेमाल करते हैं। रंग, लाइट और शेड का प्रयोग मनमोहक है।

Jugnoo Prakashan (Ektara) 2024 Gulzaar Alan Shaw

पूँछ

पूँछ के ऊपर इस मनोरंजक कविता में बंदर, लंगूर, बिल्ली, नीलगाय, शेर और आदमी—सब शामिल हैं। गुलज़ार की चुटीली भाषा हो और हँसता-चिलखता मिसप्रिंट का इस्तेमाल डिज़ाइन में बड़े प्रयोगात्मक और आकर्षक ढंग से किया गया हो, तो कौन है जो इस किताब को चुनना, पढ़ना और गुनगुनाना न चाहेगा।

चित्रों में गणितीय संरचना और बारीक काम का सुंदर प्रदर्शन है। वाइट स्पेस का प्रभावशाली उपयोग आँखों को घूमने और दिमाग़ को सोचने की गुंजाइश देता है। ऐसी चित्र-पुस्तकें सुकून देती हैं।

Jugnoo Prakashan (Ektara) 2024 Gulzaar Alan Shaw

धुन्ना कै पँड़िया

लोकभाषा में रची यह कविता यथार्थ और कल्पना का अद्भुत सम्मिश्रण है। इसमें भैंस की पाड़ों की खूबसूरती, फुर्ती, दौड़ और चंचलता—सबका मोहक वर्णन मुखर लय और सुगठित छंद के माध्यम से, तथा दैनिक बिंबों के सहारे किया गया है। इसका पूरा आनंद कविता के सस्वर पाठ से ही मिल सकता है।

“धुन्ना कै पँड़िया” जीव-जगत के सौंदर्य का समारोह है और साथ के चित्र-रंग तथा गति-अंकन पाड़ी के सौन्दर्य का नायाब मूर्तन।

Jugnoo Prakashan (Ektara) 2024 Prerna Shukla Atanu Roy

जब धूप भी हो और बारिश भी

“जब धूप भी हो और बारिश भी” वाली मज़ेदार कहावत हम सबने बचपन में सुनी है – और इसी को गुलज़ार ने अपनी कल्पना से और भी दिलचस्प बना दिया है। यह प्यारी-सी कविता धूप, बारिश और गीदड़ों की दुनिया को नए रंगों में दिखाती है। भाषा में खेल और संप्रेषणीयता है – हल्की-सी शरारत, लय और ताज़गी के साथ।

चित्र नाटकीय, बोल्ड और बेहद व्यंजक हैं। डबल-स्प्रेड पर फैला स्पेस धूप-बारिश का पूरा मौसम रच देता है। गीदड़, हाथी और बाकी जीव इतने जीवंत दिखते हैं कि लगता है जैसे कहानी पन्नों से बाहर आ रही हो।

Jugnoo Prakashan (Ektara) 2024 Gulzaar Priya Kuriyan

ऊटपटांग

ऊटपटांग: जैसा कि शीर्षक से ही स्पष्ट है, यह किताब बेतुकी या नॉनसेंस कही जाने वाली कविताओं की बेहद मज़ेदार किताब है। यह एक टाँग वाले मुर्ग़े से शुरू होकर तुक की ज़रूरत के मुताबिक़ इस तरह बनती चलती है कि इसे एक अखंड कविता की तरह भी पढ़ा जा सकता है और कविता-श्रृंखला की तरह भी। बेमेल चीज़ें कल्पना-लोक में सहज ही घुलमिल जाती हैं। इसकी लय लोकगीतों या बुझौवल की याद दिलाती है और भाषा का खेल देखते ही बनता है। चित्रांकन कविताओं को साकार करते हुए उन्हें विस्तार भी देता है।

Jugnoo Prakashan (Ektara) 2024 Gulzaar World Frieda Shaw and Alan Shaw

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