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When I met the Mama Bear- A Forest Guard’s Story
This book is the story of Priya, a young woman who works as a forest guard in Melghat National Park. Priya tackles loneliness and fear, and living away from her daughter. One day, she encounters a mother bear and cubs while on her rounds leading to a fearful adventure with an unexpected ending. A special book for young readers that not only tells an exciting story but gives the context as well, which makes it a cross-genre book in many ways.
This is a heart-warming wordless picture book which tells the story of an indie dog in a busy city. Dugga’s life is not easy – he lives beneath the sidewalk, forages for food and often faces the wrath of humans. But as a survivor he’s incredibly endearing. Then one day he has a nasty accident. The illustrations are remarkable, done only in shades of brown, as they make us relook at all the dogs who live and survive on the streets around us.
‘ये सारा उजाला सूरज का’ एक सम्मोहक कविता है जो संसार की हर शै में सूरज की उपस्थिति और रूपांतरण को प्रस्तुत करती है।हवा,पानी,जीवों तक में सूरज अलग अलग रंग-रूप में मौजूद है।नये बिम्बों,कल्पनाशील प्रयोगों और जादुई संगीत के कारण यह कविता पुस्तक सहज ही कंठस्थ की जा सकती है।शब्दों को विस्तार देते चित्र सूर्य-किरण के वर्ण-क्रम को व्यक्त करते हैं।सूर्य के महिमा-गान के साथ यह कविता सभी जीवों और पदार्थों की आंतरिक एकता को स्वर देती है।
‘बेटियाँ भी चाहें आज़ादी’ ताक़त और विश्वास के साथ स्त्रियों की हरसंभव स्वाधीनता की उद्घोषणा करती है। यहाँ साधारण से लगने वाले वाक्य भी नारों जैसी तात्कालिकता और ओजस्विता प्राप्त कर लेते हैं।जीवन के हर क्षेत्र में हर तरह की आज़ादी के बग़ैर स्त्री-पुरुष समानता संभव नहीं है।यह किताब संविधान प्रदत्त अधिकारों और मन की बात कहने की आज़ादी की माँग करती है।आकर्षक चित्रों से सज्जित यह किताब बेटियों की पू्र्ण स्वाधीनता का घोषणा-पत्र है।
इस नन्हीं-सी कल्पनाशील कविता को बार-बार पढ़ने की अभिलाषा होती है शायद अगली बार कुछ अर्थ या भाव बन सके। कुछेक बार पढ़ने पर ही कविता से निकटता बन पाती है । प्रकृति के सन्दर्भ में खोल शब्द से कई मायने बनते बदलते रहते हैं। संभवतः कविता कहती है , खोल के प्रस्तुत प्रकृति में कुछ भी छुपाए या चुराए जाने का डर नहीं है, यह तो दुनिया है, जो चप्पे-चप्पे तालों में है । सुकून देते चित्र कविता के भाव को कुछ और आगे ले जाते हैं। लेखन की केलीग्राफ़ी सुन्दर व कविता के भावों के अनुरूप है। कविता को शब्दशःयाद करना भले संभव न हो, फिर कभी दुबारा पढ़ने पर कुछ नया कहने, गुनगुनाने वादा ज़रूर करती है।
लाइटनिंग, यह सुन्दर और कल्पनाशील नाम है एक बाघिन का, जिसके इर्द गिर्द यह कहानी बुनी गई है। कहानी बाघिन के बारे में रूढ़ मान्यताओं को दरकिनार करते हुए उसकी नैसर्गिकता को सामने लाती है। उसके अपने घर व घर के अन्य बाशिंदों के साथ प्यार और चाहत के रिश्तों को उभारती है। और उभारती है मानव समुदाय की जंगल जीवों के प्रति उस आत्मीय जवाबदेही को जिसके बिना पर ही इन सबका जीवन संभव और सुखद लगता है। सधी हुई भाषा में ताजगी, सादगी और रवानगी है। सभी चित्र बेमिसाल है खासकर तब का जब ‘चाँद को गर्व हो रह था…कुछ ही देर पहले वह यहाँ थी’ और बाघिन के वहाँ होने को चित्र में उकेरा गया है।
इस किताब की कहानियाँ बेहद नएपन से आम जीवन के सामाजिक, साहित्यिक, सांगीतिक, मानवीय, शैक्षिक और पर्यावरण से जुड़े गहरे सरोकारों को अपने में शामिल करती जाती है। जिनमें बच्चों के स्वभाव और चाहते हैं , उनकी उदासी और दोस्ती है । और भी बहुत कुछ है जो आज के साहित्य में अपेक्षित है । कहानियाँ जितने अनूठे विषयों पर हैं, कही भी उसी अनूठेपन से गई है । बेहद सधी हुई ताज़ातरीन भाषा, विचारों व भावों के अनुरूप हैं । कहानियों को विस्तार और गहराई देने का ज़िम्मा लेते चित्र बेमिसाल हैं।
किताब में सुविख्यात बाल साहित्य लेखक श्रीप्रसाद द्वारा बच्चों के लिए रची गई कविताओं को संजोया गया है। जिनमें बालमन की गहराइयाँ हैं, जीव-जीवन का स्पंदन है, रिश्तों की गरमाहट है, मनोरंजन, कौतुक और ज्ञान-विज्ञान है। शब्दों के खेल, सवाल और वह सब कुछ जो बच्चों को भाता है। कविताओं में यह सब इतना सहज,स्वाभाविक और लयबद्ध है कि बार बार पढ़ने-गुनगुनाने का मन करता है। चित्र प्रभावशील और कविताओं को उभारते से लगते है।‘ पौधा तो जामुन का ही था’ और ‘हाथी चल्लम चल्लम’ बहुत दिलचस्प हैं । ये कविताएँ हिंदी के आधुनिक बाल साहित्य की एक परम्परा से रूबरू कराती हैं।