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A magnificent book which takes you into the artistic world of Ganesh Pyne, where there are strange creatures and images from fairy tales, mythology and fables. Priya Kuriyan takes elements from Pyne’s art and creates stunning images as pull-out, pop-ups, each page awash with colour and surprises. The book itself is a fantastical journey into Pyne’s surreal world. You’ll find the sinister and the playful, both in this book.
Have you ever struggled to understand your relationship with your mother? In this picture book, Shakthi finds a way to deal with her mother’s harsh words. With the help of a friend, she looks for the light within. Beautifully illustrated by Proiti Roy, the warmth of the yellow light draws us into Shakthi’s world.
A beautifully descriptive historical novel set in 1932, around 12-year old Leela and her life in Mysore. The details are never boring and contribute enormously to the world building. The story also delves into the changing attitudes of people towards British Rule at a pivotal moment in the freedom movement. In today’s context, this title makes for an essential read that helps us think of the many ways that contributed to achieve the freedom of self-governance and how different parts of the country imagined and participated in it.
यह किताब एक सप्तपर्णी के पेड़ से लेखक का संवाद है जिसमें पेड़ के अंदर होने वाली क्रियाओं के ऊपर लेखक अपनी कल्पना-शक्ति से बहुत से रंग और खुशबुएँ भरता है।
पेड़, धूप, खुशबू, कीड़े आदि का प्रभावपूर्ण मानवीकरण है जो उन्हें सम्मान की भूमिका में रखते हुए पाठक के लिए एक जुड़ाव बनाता है। पेड़ के साथ अनेक प्राणियों के अंतरंग संबंधों से पर्यावरण में परस्पर निर्भरता और मनुष्य का इसमें एक हिस्सा होना बख़ूबी निकल के आता है। मात्र आठ पन्ने की किताब में चित्रांकन की कई शैली शामिल हैं और कवर और बैक कवर भी पूरी किताब में सुंदरता से समन्वित हैं जिससे कि इसे पढ़ने का अनुभव भरा पूरा लगता है।
‘सच्ची और रोमांचक कहानियाँ’ पाँच ऐसी घटनाओं पर आधारित हैं जो अलग-अलग जगहों और समयों से ली गई हैं—कहीं आइन्स्टाइन का शहर, कहीं बर्फ़ीली रात की रेल-यात्रा या किसी विदेश के संग्रहालय में बंद हो जाने का अनुभव। हर कहानी में सिहरन और अचरज है, लेकिन भाषा बिल्कुल सहज, बोलचाल की है, जो पाठक को तुरंत अपनी ओर खींच लेती है। किताब के धुंधले-भूरे चित्र रहस्य का रंग और गहराते हैं। रोचक, सजीव और बच्चों की जिज्ञासा जगाने वाली यह पुस्तक अन्त तक बाँधे रखती है।
‘मेरा बचपन’ एक बच्चे की कहानी है जिसके जीवन की शुरुआत कबाड़ बीनने से होती है, फिर होटल में काम, फिर अख़बार की फेरी और फिर स्कूल और पढ़ाई। और उसका मन पढ़ाई में लग जाता है। सीधी, सरल भाषा में यह मार्मिक आत्मपरक कथा प्रस्तुत की गयी है। कथा का महत्त्व इस बात को इंगित करने में भी है कि कोई भी काम छोटा या हेय नहीं होता, और यह भी कि अवसर मिलने पर कोई भी इंसान कुछ भी हासिल कर सकता है। ’मेरा बचपन’ एक साधारण व्यक्ति के जीवट और स्वप्न की दास्तान है।
बुलबुल-ए-परिस्तान: फ़ातिमा बेगम कौन थीं?
यह कहानी सरल भाषा में बताती है कि फ़ातिमा बेगम ने कैसे हिम्मत, मेहनत और अपने फैसलों पर भरोसा रखते हुए शुरुआत के फ़िल्मी दौर में अपनी जगह बनाई।
‘बीरबहूटी’ लाल रंग के सुंदर छोटे छोटे मखमली बरसाती कीट के वर्णन से शुरू होकर पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाले दो दोस्त बेला और साहिल की कथा है जो अब आगे की पढ़ाई के वास्ते अलग हो जाएँगे। बीच में कक्षा के और बाहर के बहुत से प्रसंग हैं। यह मार्मिक कथा अनेक बच्चों के जीवन की अपनी कथा भी हो सकती है। बचपन की मासूम, सरल दोस्ती की याद सँजोती यह कहानी उन दिनों का पुनरावलोकन है, स्मृति को समृद्ध करती हुई। चित्र भी उतने ही सजीव और प्राणवान हैं।