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किताब में आम इन्सान के जीवन में रची बसी चीजों हवा, जल, मिटटी, आलू , साइकिल, मिर्ची आदि के बारे में नायब और अनसुनी बातें हैं I जो ललित निबन्ध सा आनन्द देते है। लेखक इन चीजों को अपनी अनोखी व बारीक नज़रों से देखते और अभिभूत करते हैं। चीजों को नज़दीक से देखने और बयाँ करने की सूक्ष्म दृष्टि मिलती है। सच्चाइयों और कल्पनाओं का तालमेल पढ़ने की उत्सुकता बनाए रखता है।
भाषा रवानगी और प्रस्तुतिकरण किताब को अनूठा बनाते हैं। चित्र भी उतने ही सलोने और बोलते हैं, जितनी इसकी छोटे-छोटे वाक्यों में सधी हुई भाषा । पाठक को समृद्ध भाषा व अभिव्यक्ति के विविध रूपों से परिचित होने के मौके मिलते हैं
कहानी सशक्त है और समाज के उस वर्ग की परिस्थितियों के यथार्थ और मानवीय रिश्तों को दिखाती है जिनकी जगह आम बाल साहित्य में विरले ही मिलती है। कहानी में बच्ची का नाम मिट्टी ही बहुत कुछ कहता है। उसकी एक स्वाभाविक लेकिन असम्भव-सी इच्छा को पूरा करने के लिए माँ के सूझबूझ भरे जतन बच्चे के लालन-पालन की सीमाओं को एक अलग सन्दर्भ देते हैं । चित्र सहज सादगीपूर्ण और कहानी को बोलते-कहते लगते हैं। आठ पेज़ की एक रंगी छोटी-सी किताब कहानी के मामले में उम्दा है। बाल साहित्य में इस तरह की कहानियों का सादगी और सस्ते में आना सुकून देता है।
School Mein Humne Seekha Aur Sikhaya
यह छोटी-सी किताब अंग्रेजी माध्यम में पढ़नेवाले कई बच्चों की आपबीती हो सकती है । छोटे- बड़े गाँव शहरों में अभिभावक बड़े उम्मीदों से से बच्चे को अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में दाखिल करते हैं, पर ज़्यादातर बच्चों के लिए भाषा अपरिचित होने के कारण पढ़ाई कठिन और नीरस हो जाती है। यह किताब गोंड बच्चों के माध्यम से, इसी समस्या को उजागर करती हैं।यह श्रृंखला सरल भाषा,सहज प्रस्तुति और सार्थक प्रयास का उदाहरण है , जिसपर छात्र और शिक्षकों के बीच चर्चा निहायत जरुरी है ।
मुस्कान’ संस्था की बहुत ही सरल और छोटी सी दिखने वाली यह किताब अति संवेदनशील मुद्दे पर केंद्रित है। आज जब इंसान ने सभी जीवों की जगह हथिया ली है, यह कहानी इस नज़रिये को प्रस्तुत करती है कि यह धरती दूसरे जीवों की भी है। हम अनजाने में ही उनके घर और क्षेत्र में घुसपैठ कर रहे होते हैं। छोटी सी यह कहानी आदिवासी जीवन और लैंगिक समानता को भी बड़ी सहजता से प्रस्तुत कर देती है।
यह पूरे भारत के अलग-अलग क्षेत्रों के बच्चों द्वारा रचित चित्रों के साथ छोटी-बड़ी, खट्टी-मीठी, सरल-पेचीदा किस्से-कहानियों का संग्रह है। इसमें सभी वर्गों के पाठकों के लिए कुछ न कुछ मज़ेदार या दिलचस्प मिल जाता है। ये कहानियां केवल मनगढ़ंत ही नहीं बल्कि बच्चों की और आम लोगों की ज़िन्दगी की कहानियां भी हैं जिनके साथ बच्चे अपनी ज़िन्दगी को भी जोड़ सकेंगे।
देश के अलग अलग प्रदेशों से आनेवाले बच्चों द्वारा लिखी गयी चुनिंदा कविताओं का यह खुशमिजाज संकलन हर स्कूल की लाइब्रेरी में होनी चाहिए। सभी कविताएं बेहद सहज और सरल हैं ,खूबसूरत चित्रों से सजाई हुई। कविताओं के विषय आम तौर पर पाठ्यपुस्तकों में मिलनेवाली कविताओं की तरह भारी- भरकम नहीं, बच्चों की दुनिया से जुड़े हुए हैं इसलिए वे बच्चों को जरूर पसंद आएंगी । बच्चों को कविताओं और किताबों की दुनिया से ख़ुशी -ख़ुशी जोड़नेवाली किताब, बेहद आकर्षक प्रस्तुति!
“एकलव्य की पत्रिका चकमक के कॉलम ‘माथापच्ची’ में छपी गतिविधियों का सुविचारित संकलन है। इनमें पहेलियाँ, भूलभुलैया, सुडोकू, छुपनछुपाई, अन्तर खोजो और माथापच्ची के सवाल शामिल हैं। पहेलियाँ ,बच्चों और बड़ों को मजेदार दिमागी खेलों के साथ खेलते हुए समस्याओं और सवालों से जूझने व सुलझाने, चीज़ों को बारीकी से देखने और तलाशने, तर्क वितर्क करने, कार्य-कारण रिश्ते खोजने, अंतरों को पहचानने, अनुमान लगाने, तुलना व कल्पना करने और कई हस्तकौशल आदि के अवसर मुहैया कराती हैं। पहेलियों और चित्रों का संयोजन उम्दा है। चित्र बच्चों के जीवन से जुड़े प्रतीत होते हैं पाठकों को बातचीत और सोचने विचारने का अवसर देते हैं।”
“Do you ask too many questions? If you don’t, then maybe you should. This is what Ritu Miss tells Mini in the delightfully written story in which Mini’s questions solve a mystery. This book will put a smile on your face and inspire you to ask many questions of your own!”