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“This is a heart-warming story of two sisters who take up several odd jobs to get a surprise gift for their mother. The colourful illustrations place the story among the Muslim community who weave sarees in Kota.”
“कहानी कहती है– दुनिया इसके सभी रहवासियों से है। रहवासियों के बनाने से दुनिया बनती है। मिलकर जीवन जीने, एक दूसरे का ख्याल रखने, जरूरतों की कद्र से यह दुनिया बनती रही आई है। यह दुनिया के उजाले को बनाए रखने में अपने हिस्से के उजाले को शामिल करने की कहानी है। यह सब पाने के लिए पाठक को कहानी में कई बार डूबना उतरना पड़ता है।
किताब में की गई चित्रकारी, किसी बच्चे या शायद तारिक के द्वारा बनाए गए चित्रों सा आभास कराती है। के बनाए चित्रों का आभास कराती है। यह दृष्टि चित्रकारी को नया आयाम देती हैI पानी के रंगों से बने चित्र एक दूसरे से घुलते मिलते नज़र आते हैं।”
जंगली जीवों पर आधारित किस्सों के इस संकलन में बहुत रोमांचकारी कहानियां हैं जिन्हें पढ़कर पाठक बिलकुल मंत्रमुग्ध हो जाएंगे। उस लिहाज़ से यह संकलन ऐसे दूसरे संकलनों के समान है। लेकिन जो बात इसे ख़ास बनाती है, वो इसके रोमांचकारी किस्सों से भी ज़्यादा यह है कि लेखक ने जंगली जीवों की आदतों, उनके हाव-भाव और उनकी संरचना आदि का बहुत बारीक वर्णन भी कहानियों में समाहित किया है और वह भी उनके रोमांच को बरकरार रखते हुए।
जैसा की नाम में ही निहित है, ये एक चोर की चौदह रातों का ताना-बाना है। हर रात की एक कहानी है और हर कहानी जीवन और दुनिया के कड़वे सच से रूबरू करवाती है। ये कहानियां पाठक को सोचने पर मजबूर करती हैं कि आखिर चोर, साधू-संत, भला या बुरा- क्या ये सब वर्गीकरण सचमुच इंसान के चरित्र और कर्म पर आधारित हैं या समाज द्वारा गढ़ा गया भ्रम। किशोरों के लिए ये कहानियां एक अनमोल खज़ाना हैं।
इस कहानी में वेदना और संवेदना दोनों हैं। कहानी में पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों और प्रकृति के प्रति बहुत ही संवेदनशील दृष्टिकोण उभर कर सामने आता है। लेकिन दूसरी ओर इस संवेदना को तार-तार करती हुई भौतिकवादी इंसान की प्रवृत्ति की तस्वीर भी उभरती है। दोनों के टकराव को लेकर यह बेहतरीन कहानी बुनी गई है। कहानी का नाम गोदाम क्यों है और उस गोदाम में इंसान की क्या जगह है, यह कहानी के अंत में पता चलता है।
परिवार में मौत जैसी दुःखद घटना बच्चों के मन पर गहरा असर डालती है। उसका सामना और भी मुश्किल हो जाता हैं क्योंकि अक्सर, परिवार के बड़े इस विषय पर बच्चों से बात नहीं करते और आसपास का वातावरण ग़मगीन होने के कारण बच्चों के मन में उठते सवाल और डर दबे -दबे से रह जाते हैं । यह किताब दादी के चले जाने के बाद बच्ची के मन में आनेवाले विचारों की प्रस्तुति है जो बच्चों को अपनी बात रखने का संवेदनशील अवसर, बड़ी कुशलता से देती है।
कहानी सशक्त है और समाज के उस वर्ग की परिस्थितियों के यथार्थ और मानवीय रिश्तों को दिखाती है जिनकी जगह आम बाल साहित्य में विरले ही मिलती है। कहानी में बच्ची का नाम मिट्टी ही बहुत कुछ कहता है। उसकी एक स्वाभाविक लेकिन असम्भव-सी इच्छा को पूरा करने के लिए माँ के सूझबूझ भरे जतन बच्चे के लालन-पालन की सीमाओं को एक अलग सन्दर्भ देते हैं । चित्र सहज सादगीपूर्ण और कहानी को बोलते-कहते लगते हैं। आठ पेज़ की एक रंगी छोटी-सी किताब कहानी के मामले में उम्दा है। बाल साहित्य में इस तरह की कहानियों का सादगी और सस्ते में आना सुकून देता है।
School Mein Humne Seekha Aur Sikhaya
यह छोटी-सी किताब अंग्रेजी माध्यम में पढ़नेवाले कई बच्चों की आपबीती हो सकती है । छोटे- बड़े गाँव शहरों में अभिभावक बड़े उम्मीदों से से बच्चे को अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में दाखिल करते हैं, पर ज़्यादातर बच्चों के लिए भाषा अपरिचित होने के कारण पढ़ाई कठिन और नीरस हो जाती है। यह किताब गोंड बच्चों के माध्यम से, इसी समस्या को उजागर करती हैं।यह श्रृंखला सरल भाषा,सहज प्रस्तुति और सार्थक प्रयास का उदाहरण है , जिसपर छात्र और शिक्षकों के बीच चर्चा निहायत जरुरी है ।