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एक सत्य घटना पर आधारित यह मार्मिक कहानी इंसान और कुत्तों के बीच पनपने वाले प्यार के सरल-सपाट विवरण से दिल को छू लेती है।
जैसे कि कई सड़क के कुत्ते होते हैं, रामू जिजीविषा का प्रतीक है और पाठक को अपना बना लेता है। लेखक की कामकाजी व्यस्तताओं से समझौता कर, वह एक मूँगफली बेचनेवाले लड़के के पास भी समय बिताता है। जीवन की परिस्थितियाँ लेखक को गाँव वापिस ले जाती हैं और लौटने पर रामू उन्हें नहीं मिलता। पर उसकी याद उनके और पाठक के दिल में स्थाई जगह बना लेती है। लेखन शैली तथा चित्रांकन दोनों ही इस कहानी के सूक्ष्म भाव को यूँ पकड़ते हैं कि पाठक देर तक उस दुनिया में बना रहता है।
कविता लयात्मक और सुमधुर है। सुमधुर ध्वनियों और आनुप्रासिक प्रयोगों के कारण पढ़ना सीख रहे शुरुआती पाठक इस किताब की ओर आकर्षित होंगे। ‘अकॉर्डियन फोल्ड’ के कारण इस किताब को पलटने में भी एक खेल है। अर्थ के स्तर पर भी यह एक अच्छी कविता है। भाव के स्तर पर कविता में स्वतंत्रता और खुलेपन का भाव है। अपने अनूठे डिज़ाइन, सांगीतिक भाषिक प्रयोगों और खुलेपन के भाव के कारण यह इस वर्ष प्रकाशित हुई किताबों में एक अच्छी किताब है।
‘पानी उतरा टीन पर’ छंदोबद्ध कविताओं का संग्रह है। आसपास की चीज़ों जैसे बारिश, सूरज,चाँद, चींटी को लेकर सृजित ये कविताएँ सुपरिचित को नये तरीक़े से प्रस्तुत करती हैं। इनमें स्वर और तुकों का खेल मोहक है। कल्पना को जागृत करती ये कविताएँ सहज ही कंठस्थ हो जाती हैं। आसपास के सौन्दर्य को प्रकाशित करने वाली ये कविताएँ भाषा के प्रयोगात्मक व्यवहार के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। साथ के रेखांकन कविताओं के भावों का पुनर्सृजन करते हैं।
कई पन्नों पर नयनाभिराम चित्रों के साथ सज्जित यह कविता रोज़-ब-रोज़ के एक सुपरिचित दृश्य यानी फेरीवालों के मुहल्ले में आने और बच्चों-सयानों के उनके पास आ जुटने का वर्णन करती है। बोलचाल की सहज पर व्यंजक भाषा में इसकी रचना हुई है। पूरे-पूरे सुगठित वाक्य इसकी शोभा हैं। अनेक ब्योरों से भरी यह कविता चित्रात्मक और मार्मिक है। फेरीवाले के बीमार पड़ने पर पूरे मुहल्ले की सहानुभूति हमारे सामाजिक जीवन और मानवीयता को दर्शाती है।