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जैसा की नाम में ही निहित है , ये एक चोर की चौदह रातों का ताना-बाना है। हर रात की एक कहानी है और हर कहानी जीवन और दुनिया के कड़वे सच से रूबरू करवाती है। ये कहानियां पाठक को सोचने पर मजबूर करती हैं कि आखिर चोर, साधू-संत, भला या बुरा- क्या ये सब वर्गीकरण सचमुच इंसान के चरित्र और कर्म पर आधारित हैं या समाज द्वारा गढ़ा गया भ्रम। किशोरों के लिए ये कहानियां एक अनमोल खज़ाना हैं।