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सुनीता मिश्रा इंस्टिट्यूट ऑफ़ होम इकोनॉमिक्स के प्राथमिक शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं और भाषा-शिक्षण, भाषा-विज्ञान तथा बाल- साहित्य के विषय पढ़ाती हैं। बाल-साहित्य व कहानियों के माध्यम से भाषा-शिक्षण में उनकी विशेष रूचि है। भाषा के संज्ञानात्मक पहलू पर उनका शोध भी है और रूचि भी।

मेरे विचार से बाल-साहित्य का सबसे महत्वपूर्ण आयाम है बच्चों की कल्पनाशीलता और दुनिया को देखने-समझने के उनके नज़रिये के लिए पर्याप्त अवसर होना। बाल- साहित्य का उद्देश्य कहानियों में बच्चों को पात्र बना देना भर नहीं है बल्कि बच्चों के नज़रिये से दुनिया और जीवन के अनुभवों को समझना है। यहाँ दो बात ज़रूरी हैं – १. हमेशा ही अति सरल या सकारात्मक होना आवश्यक नहीं है और, २. किशोरों के लिए भी बाल-साहित्य में सामग्री होनी चाहिए।