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मनोज पिछले दो दशकों से हिन्दी साहित्य और स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होने नब्बे के दशक में दिल्ली विश्विद्यालय से हिन्दी साहित्य में एम. ए. और एम. फिल. की डिग्री हासिल की और कुछ समय तक अलग-अलग विश्वविद्यालयों में हिन्दी भाषा और साहित्य का अध्यापन किया। सम्प्रति वे अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय में ‘हिन्दी भाषा-शिक्षण’ और ‘शिक्षा के समाजशास्त्र’ के अध्यापन से जुड़े हुए हैं। ‘बाल साहित्य’ के क्षेत्र में मनोज की विशेष रुचि है क्योंकि यह शैक्षिक गतिविधि का एक ऐसा क्षेत्र हैं जिसमें शिक्षा के साथ साहित्यिक और सौंदर्यशास्त्रीय विमर्श की गुंज़ाइश है।